जय हो जय हो महाकाल राजा,
तेरी किरपा की छाई है छाया ।
जय हो जय हो महाकाल राजा,
तेरी किरपा की छाई है छाया ।
हर तरफ तू ही तू है समाया,
धन्य तेरी है तेरी ही माया ।
जय हो जय हो महाकाल राजा,
तेरी किरपा की छाई है छाया ।
तुमने देवो को अमृत दिया है,
आपने खुद ही विष को पिया है ॥
देवताओं का मान बडाया,
सागरमंथन के विष से बचाया ॥
जय हो जय हो महाकाल राजा,
तेरी किरपा की छाई है छाया ॥
वरदानी हो भोले कैलाशी,
डमरू वाले है काशी के वासी ॥
गले सर्पो का हार सजाया,
सर भभुति का टीका लगाया ॥
जय हो जय हो महाकाल राजा,
तेरी किरपा की छाई है छाया ॥
मंत्र: अलसस्य कुतः विद्या (Alasasya Kutah Vidya)
श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी - भजन (Shri Krishna Govind Hare Murari)
तेरी ज्योति में वो जादू है: भजन (Teri Jyoti Me Wo Jadu Hai)
भोले जिसने भी तुमको पुकारा,
तुमने उनको दिया है सहारा ॥
सारे भगतो का मान बड़ाया,
तेरे चरणो में शिवाजी आया ॥
जय हो जय हो महाकाल राजा,
तेरी किरपा की छाई है छाया ॥
Singer: Shivaji Patil








