
मेहराँ वालिया साइयाँ रखी चरना दे कोळ – शब्द कीर्तन (Mehra Waliya Rakhi Charna De Kol)
मेहराँ वालिया साइयाँ रखी चरना दे कोळ, रखी चरना दे कोल रखी चरना दे कोल, मेहराँ वालिया साइयाँ रखी चरना दे कौल मेरी फ़रयाद तेरे

मेहराँ वालिया साइयाँ रखी चरना दे कोळ, रखी चरना दे कोल रखी चरना दे कोल, मेहराँ वालिया साइयाँ रखी चरना दे कौल मेरी फ़रयाद तेरे

तुम शरणाई आया ठाकुर तुम शरणाई आया ठाकुर ॥ उतरि गइओ मेरे मन का संसा, जब ते दरसनु पाइआ ॥ तुम शरणाई आया ठाकुर अनबोलत

तू मेरा राखा, सबनी थाई तां भौ के हा काढा जी, तां भौ के हा काढा जी, तू मेरा राखा, सबनी थाई तां भौ के

भज राधे गोविंदा रे पगले, भज राधे गोविंदा रे, तन परिंदे को छोड़ कही, उड़ जाये ना प्राण परिंदा रे, भज राधें गोविंदा रे पगले,

हे गोवर्धन गिरधारी, तुझे पूजे दुनिया सारी, तेरी परिक्रमा जो करले, मिट जाए विपदा सारी, हे गोवर्धंन गिरधारी, तुझे पूजे दुनिया सारी ॥ है सात

झाड़ो मोरछड़ी को लगवाले, हो जासी कल्याण, मोरछड़ी के माए विराजे, खाटू वालो श्याम, झाड़ो मोरछड़ी को लगवालें, हो जासी कल्याण ॥ बहुत घणी सकलाई

आदि अंत मेरा है राम, उन बिन और सकल बेकाम ॥ कहा करूं तेरा बेद पुराना, जिन है सकल जगत भरमाना ॥ कहा करूं तेरी
