
चटक मटक चटकीली चाल, और ये घुंघर वाला बाल: भजन (Chatak Matak Chatkili Chaal Aur Ye Ghunghar Wala Baal)
चटक मटक चटकीली चाल, और ये घुंघर वाला बाल, तिरछा मोर मुकट सिर पे, और ये गल बैजंती माल, तेरी सांवरी सुरतिया, पे दिल गई

चटक मटक चटकीली चाल, और ये घुंघर वाला बाल, तिरछा मोर मुकट सिर पे, और ये गल बैजंती माल, तेरी सांवरी सुरतिया, पे दिल गई

मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई जाके सर मोर मुकुट मेरो पति सोई मेरे तो गिरधर गोपाल

ये मेरी अर्जी है, मै वैसी बन जाऊँ, जो तेरी मर्जी है ॥ दोहा – मैंने कब कहा, की मुझे दुनिया का माल दे, लगी

जय श्री वल्लभ, जय श्री विट्ठल, जय यमुना श्रीनाथ जी । कलियुग का तो जीव उद्धार्या, मस्तक धरिया हाथ जी ॥ मोर मुकुट और काने

श्याम के बिना तुम आधी, तुम्हारे बिना श्याम आधे, राधे राधे राधे राधे, राधे राधे राधे राधे, आठो पहर जो रहे अंग संग, उस सांवरे

हम तो दीवाने मुरलिया के, अजा अजा रे लाल यशोदा के । तेरी बाट जोहे राधा गोरी, वो तो आई है चोरी चोरी । कहा

कबहुँ ना छूटी छठि मइया, हमनी से बरत तोहार हमनी से बरत तोहार तहरे भरोसा हमनी के, छूटी नाही छठ के त्योहार छूटी नाही छठ
