
ब्रजराज ब्रजबिहारी! इतनी विनय हमारी – भजन (Brajaraj Brajbihari Itni Vinay Hamari)
ब्रजराज ब्रजबिहारी, गोपाल बंसीवारे इतनी विनय हमारी, वृन्दा-विपिन बसा ले कितने दरों पे भटके, कितने ही दर बनाये अब तेरे हो रहें हैं, जायें न

ब्रजराज ब्रजबिहारी, गोपाल बंसीवारे इतनी विनय हमारी, वृन्दा-विपिन बसा ले कितने दरों पे भटके, कितने ही दर बनाये अब तेरे हो रहें हैं, जायें न

मैं तो अपने श्याम की, दीवानी बन जाउंगी, दीवानी बन जाउंगी, मस्तानी बन जाउंगी, मैं तो अपने श्याम की, दिवानी बन जाउंगी । जब मेरे

श्याम रंग में रंग गई राधा, भूली सुध-बुध सारी रे, राधा के मन में, बस गए श्याम बिहारी ॥ श्याम नाम की चुनर ओढ़ी, श्याम

बंसी बजा के मेरी निंदिया चुराई, लाडला कन्हैया मेरा कृष्ण कन्हाई, कुञ्ज गली में ढूंढें तुम्हे राधा प्यारी, कहाँ गिरधारी मेरे कहाँ गिरधारी ॥ आँख

मनमोहन तुझे रिझाऊं, तुझे नित नए लाड़ लड़ाऊं, बसा के तुझे नैनन में, छिपा के तुझे नैनन में ॥ गीत बन जाऊं तेरी, बांसुरी के

था बिन दीनानाथ, आंगली कुण पकड़सी जी, कुण पकड़सी जी सांवरा, कुण पकड़सी जी, था बिन दिनानाथ, आंगली कुण पकड़सी जी, म्हारी पीड़ हरो घनश्याम

तू ही कन्हैया तू ही लखदातार है, लखदातार है तू लीले का सवार है, सांवरे तेरी तो लीला अपरम्पार है, मोहना तू ही लखदातार है।
