
जयपुर की चुनरिया मैं लाई शेरावालिये: भजन (Jaipur Ki Chunariya Me Layi Sherawaliye)
जयपुर की चुनरिया, मैं लाई शेरावालिये, जयपुर की चुनरिया, मैं लाई शेरावालिये । आगरा से लहंगा, जयपुर से चुनरिया, दिल्ली के दरीबे से लाई, सितारे

जयपुर की चुनरिया, मैं लाई शेरावालिये, जयपुर की चुनरिया, मैं लाई शेरावालिये । आगरा से लहंगा, जयपुर से चुनरिया, दिल्ली के दरीबे से लाई, सितारे

श्लोक: जयंती मंगला काली, भद्र काली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवाधात्री, स्वाहा स्वधा नमोस्तुते । बड़े मान से जमाना, माँ तुमको पूजता है, तेरे नाम का

सभकेर सुधि अहाँ लै छी हे अम्बे हमरा किए बिसरै छी हे थिकहुँ पुत्र अहींकेर जननी से तऽ अहाँ जनै छी हे एहन निष्ठुर किए

मेरी मैया तेरे दरबार ये, दीवाने आए है, भक्ति में तेरी डूब के ये, भक्ति में तेरी डूब के ये, मस्ताने आए है, मेरी मईया

अम्बे रानी ने, अपना समझ कर मुझे, अपने दर पे बुलाया, मजा आ गया, शेरा वाली ने, अपना समझ कर मुझे, अपने दर पे बुलाया,

शेरावाली माँ, आए तेरे नवराते, तेरा दरबार सजा के, तुझको भक्त बुलाते, शेरावाली मां, आए तेरे नवराते ॥ अंगना में देखो मैया, रंगोली सजाई, लाल

शेरावाली के दरबार में, होती है सुनवाई, सारे जग की महारानी ये, जगदम्बा महामाई, शेरावाली के दरबार मे, होती है सुनवाई ॥ जिसने माँगा मैया
