
मेरी चुनरी में पड़ गयो दाग री – भजन (Meri Chunri Mein Pad Gayo Dag Ri)
मेरी चुनरी में पड़ गयो दाग री, कैसो चटक रंग डारो, श्याम मेरी चुनरी में पड़ गयों दाग री, कैसो चटक रंग डारों ॥ औरन

मेरी चुनरी में पड़ गयो दाग री, कैसो चटक रंग डारो, श्याम मेरी चुनरी में पड़ गयों दाग री, कैसो चटक रंग डारों ॥ औरन

दोहा: बाबा थारी मोरछड़ी, घूमे करे कमाल । धूम मची खाटू नगर में, भक्तां करे धमाल ॥ हीरा मोत्या जड़ी जड़ी, संकट काटे खड़ी खड़ी,

दीनानाथ मेरी बात, छानी कोणी तेरे से दीनानाथ मेरी बात, छानी कोणी तेरे से आँखड़ली चुराकर बाबा, जासी कठे मेरे से आँखड़ली चुराकर बाबा, जासी

मैया मैं तेरी पतंग, हवा विच उडदी जावांगी, मैया डोर हाथों छड्डी ना, मैं कट्टी जावांगी, मईया मैं तेरी पतंग, दाती मैं तेरी पतंग ॥

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी कहाँ से आयो कुँवर कन्हैया हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी कहाँ से आयो कुँवर कन्हैया कहाँ से आई

फाग* खेलन बरसाने आये हैं, नटवर नंद किशोर । फाग खेलन बरसाने आये हैं, नटवर नंद किशोर । घेर लई सब गली रंगीली, छाय रही

चटक रंग में, मटक रंग में, धनीलाल रंग में, गोपाल रंग में । श्याम रंग संग होली खेलत गोपाल, श्याम रंग संग होली खेलत गोपाल,
