
गाइये गणपति सुबहो शाम: भजन (Gaiye Ganpati Subaho Shaam)
गाइये गणपति सुबहो शाम, मंगलमूर्ति मंगलकारी, पावनकारी तेरो नाम, गाइये गणपति सुबहों शाम ॥ रिद्धि सिद्धि के तुम ही ज्ञाता, तुम ही देते विद्या ज्ञान,

गाइये गणपति सुबहो शाम, मंगलमूर्ति मंगलकारी, पावनकारी तेरो नाम, गाइये गणपति सुबहों शाम ॥ रिद्धि सिद्धि के तुम ही ज्ञाता, तुम ही देते विद्या ज्ञान,

जय हो तेरी गणराज गजानन ॥ दोहा – प्रथमें गौरा जी को वंदना, द्वितीये आदि गणेश, तृतीये सिमरा माँ शारदा, मेरे काटो सकल कलेश ॥

गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ, गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ, मेरे मुरलीधर माधव, मेरे मुरलीधर माधव, नंदलाल चले आओ, गोविंद चले आओ, गोपाल

दर्द किसको दिखाऊं कन्हैया, कोई हमदर्द तुमसा नहीं है, दुनिया वाले नमक है छिड़कते, कोई मरहम लगाता नहीं है । दर्द किसकों दिखाऊँ कन्हैया, कोई

आपने अपना बनाया मेहरबानी आपकी, हम तो इस काबिल ही ना थे, ये कदर दानी आपकी, आपने अपना बनाया मेहरबानी आपकी॥ मैं तो तुम से

सांवरा जब मेरे साथ है, हमको डरने की क्या बात है । इसके रहते कोई कुछ कहे, बोलो किसकी यह औकात है ॥ छाये काली

अपने भगत की, आँख में आँसू, देख ना पाएगा, जब जब भी श्याम दिवानों के, सर पे संकट मंडराएगा, कन्हैया दौड़ा आएगा, अपने भगतों के
