आपने अपना बनाया मेहरबानी आपकी,
हम तो इस काबिल ही ना थे,
ये कदर दानी आपकी,
आपने अपना बनाया मेहरबानी आपकी॥
मैं तो तुम से हर तरह,
होकर अलग भागा रहा,
इस जहाँ के दौर मैं,
अटका रहा भटका रहा,
लगा लिया मुझको गले से,
ये रवानी आपकी,
आपने अपना बनाया मेहरबानी आपकी॥
कहाँ है तू और कहाँ हूँ मैं,
ये मिलना भी क्या हो सकता था,
कर कर गुनाह इस तमाश गाहे आलम मैं,
मैं भटका रहा,
बे-सबब हो गई ये रेहमतानी आपकी,
आपने अपना बनाया मेहरबानी आपकी॥
अब तो प्यारे आपके कदमों पे
सर को मैंने रख दिया,
हम इनायत हम नवाजिश,
इस करम का शुक्रिया,
तुम हमारे हम तुम्हारे,
ये जिंदगानी आपकी,
आपने अपना बनाया मेहरबानी आपकी॥
बरसो से उजड़ा पड़ा था,
मेरे दिल का ये चमन,
उजड़ी बगिया खिल उठी,
जब हो गया तेरा आगमन,
आप ने जो गुल खिलाया,
मेहरबानी आपकी,
आपने अपना बनाया मेहरबानी आपकी॥
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आपने अपना बनाया मेहरबानी आपकी,
हम तो इस काबिल ही ना थे,
ये कदर दानी आपकी,
आपने अपना बनाया मेहरबानी आपकी॥
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