
अमृत की बरसे बदरीया – भजन (Amrit Ki Barse Badariya Baba Ki Duariya)
अमृत की बरसे बदरीया, बाबा की दुअरिया, अमृत की बरसें बदरीया, बाबा की दुअरिया ॥ दादुर मोर पपीहा बोले, दादुर मोर पपीहा बोले, कूके काली

अमृत की बरसे बदरीया, बाबा की दुअरिया, अमृत की बरसें बदरीया, बाबा की दुअरिया ॥ दादुर मोर पपीहा बोले, दादुर मोर पपीहा बोले, कूके काली

श्री राम नवमी, विजय दशमी, सुंदरकांड, रामचरितमानस कथा और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से गाये जाने वाला भजन। मेरे राम मेरे घर आएंगे,

भक्ति और शक्ति के दाता, रामचरण से जिनका नाता, म्हारा बजरंगबली, म्हारा बजरंगबली ॥ राम बिना जिनको कुछ भी ना ध्यावे, राम में हरदम जो

मेरे तट पर जागे कबीर, मैं घाट भदैनी तुलसी की, युग युग से हर सर्जक बेटे, की माता हूँ मैं हुलसी सी वल्लभाचार्य तैलंग स्वामी

श्री राम जी का मंदिर, सुन्दर बनाएँगे हम, सुन्दर बनाएँगे हम, मिलकर बनाएँगे हम, श्री राम जी का मंदिर, सुन्दर बनाएँगे हम ॥ देखेगी सारी

हनुमानजी स्तुति, जय बजरंगी जय हनुमाना, रुद्र रूप जय जय बलवाना, पवनसुत जय राम दुलारे, संकट मोचन सिय मातु के प्यारे ॥ जय वज्रकाय जय

है भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे, है भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे ॥ पिया है भांग बजी है बीट, चढ़ी है मस्ती गायेंगे
