
अवध में छाई खुशी की बेला: भजन (Avadh Me Chhai Khushi Ki Bela)
अवध में छाई खुशी की बेला, अवध में छाई खुशी की बेला, लगा है, अवध पुरी में मेला । चौदह साल वन में बिताएं, राम

अवध में छाई खुशी की बेला, अवध में छाई खुशी की बेला, लगा है, अवध पुरी में मेला । चौदह साल वन में बिताएं, राम

राम नाम के साबुन से जो, मन का मेल भगाएगा, निर्मल मन के शीशे में तू, राम के दर्शन पाएगा ॥ रोम रोम में राम

मैं तो ओढली चुनरियाँ थारे नाम री, थारे नाम री थारे नाम री, मैं तो ओढली चुनरियाँ थारे नाम री, श्याम नाम की ओढ़ चुनरियाँ

एक बार गोस्वामी तुलसीदासजी को वात-व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई थी और फोड़े-फुंसियों के कारण सारा शरीर वेदना का स्थान-सा बन गया था। औषध,

पूरन ब्रह्म पूरन ज्ञान है घाट माई, सो आयो रहा आनन्द और सुनी मुनि जन, पढ़त वेद शास्त्र अंग मारी जनम गोकुल मे घटे मिटत

भइ प्रगट किशोरी, धरनि निहोरी, जनक नृपति सुखकारी । अनुपम बपुधारी, रूप सँवारी, आदि शक्ति सुकुमारी । मनि कनक सिंघासन, कृतवर आसन, शशि शत शत

श्रीमन्नारायण नारायण नारायण नारायण ।टेक। लक्ष्मीनारायण नारायण नारायण नारायण बद्रीनारायण नारायण नारायण नारायण मुक्तिनारायण नारायण नारायण नारायण सत्यनारायण नारायण नारायण नारायण गोदानारायण नारायण नारायण नारायण
