
चरण कमल तेरे धोए धोए पीवां – शब्द कीर्तन (Charan Kamal Tere Dhoye Dhoye Peevan)
सिमर सिमर नाम जीवा तन मन होए निहाला, चरण कमल तेरे धोए धोए पीवां मेरे सतगुरु दीन दयाला चरण कमल तेरे धोए धोए पीवां मेरे

सिमर सिमर नाम जीवा तन मन होए निहाला, चरण कमल तेरे धोए धोए पीवां मेरे सतगुरु दीन दयाला चरण कमल तेरे धोए धोए पीवां मेरे

छत्रधारी छत्रपति छैल रूप छितनाथ छौनी कर छाया बर छत्रीपत गाईइ राजन के राजा महाराजन के महाराजा ऐसा राज्य छोड़ और दूजा कौन धियाएई राजन

भवानी मुझे दर पे बुलाती रहियो, मैया जी मुझे दर पे बुलाती रहियो, भवानी मुझें दर पे बुलाती रहियो ॥ ये दुनिया एक भूल भुलैया,

घर में आओ लक्ष्मी माता, आओ पधारो श्री गणराजा । घर में आओ लक्ष्मी माता, आओ पधारो श्री गणराजा ॥ दीवाली का त्यौहार आया, हमने

सो सतगुरु प्यारा मेरे नाल है, जिथे किथे मैनु लै छडाई तिस गुरु कौ हौ वारिया, जिन हर की हर कथा सुनाई, तिस गुरु को

माँ का है जगराता, माँ को आज मनाएंगे, जय माता दी बोल के, सब जयकारे लाएंगे ॥ दिन आज खुशी का आया है, माँ का

बिसर गई सब तात पराई, जब ते साध संगत मोहे पाई, ना कोई बैरी नहीं बेगाना, सगल संग हमको बन आई, बिसर गई सब तात
