
श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती (Shakumbhari Devi Ki Aarti)
हरि ओम श्री शाकुम्भरी अंबा जी की आरती क़ीजोएसी अद्वभुत रूप हृदय धर लीजोशताक्षी दयालू की आरती किजोतुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ,सब घट तुम आप

हरि ओम श्री शाकुम्भरी अंबा जी की आरती क़ीजोएसी अद्वभुत रूप हृदय धर लीजोशताक्षी दयालू की आरती किजोतुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ,सब घट तुम आप

माँ तुलसी पूजन, तुलसी विवाह एवं कार्तिक माह में माँ तुलसी की आरती सबसे अधिक श्रवण की जाती है।तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो । धन तुलसी

॥ श्री गंगा मैया आरती ॥हर हर गंगे, जय माँ गंगे,हर हर गंगे, जय माँ गंगे ॥ॐ जय गंगे माता,श्री जय गंगे माता ।जो नर

बारम्बार प्रणाम,मैया बारम्बार प्रणाम ।जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके,कहां उसे विश्राम ।अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो,लेत होत सब काम ॥ बारम्बार प्रणाम,मैया बारम्बार प्रणाम । प्रलय

त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा ।त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्य राणा ।नेती नेती शब्द न ये अनुमाना ॥सुरवर मुनिजन योगी समाधी न ये ध्याना ॥जय देव जय

जय भगवद् गीते,जय भगवद् गीते ।हरि-हिय-कमल-विहारिणि,सुन्दर सुपुनीते ॥कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि,कामासक्तिहरा ।तत्त्वज्ञान-विकाशिनि,विद्या ब्रह्म परा ॥जय भगवद् गीते…॥ निश्चल-भक्ति-विधायिनि,निर्मल मलहारी ।शरण-सहस्य-प्रदायिनि,सब विधि सुखकारी ॥जय भगवद् गीते…॥ राग-द्वेष-विदारिणि,कारिणि मोद सदा

आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥गले में बैजंती माला,बजावै मुरली मधुर बाला ।श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद
