तुम्हीं में ये जीवन जिए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥
तुम्हीं से चला करती प्राणों की धड़कन
तुम्हीं से सचेतन अहंकार तन मन
तुम्हीं में ये दर्शन…
तुम्हीं में ये दर्शन किए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥
तुम्हीं में ये जीवन जिए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥
असत के सदा आश्रय हो तुम्हीं सत
तुम्हीं में विषय विष, तुम्हीं में है अमृत
पिलाते हो जो कुछ…
पिलाते हो जो कुछ पिए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥
तुम्हीं में ये जीवन जिए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥
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भगवद् गीता आरती (Aarti Shri Bhagwat Geeta)
बेटी हूँ ना मैं तेरी श्याम दर पे बुला लेना (Beti hoon na main teri shyam dar pe bula lena)
जहाँ भी रहूँ ध्यान मैं तुमको देखूँ
तुम्हीं में हूँ मैं ज्ञान मैं तुमको देखूँ
पथिक मैं ये अर्ज़ी…
पथिक मैं ये अर्ज़ी दिए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥
तुम्हीं में ये जीवन जिए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥








