प्रभु जी तुम चंदन हम पानी,
जाकी अंग-अंग बास समानी,
प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥
प्रभु जी तुम घन बन हम मोरा,
जैसे चितवत चंद्र चकोरा,
प्रभु जी तुम चँदन हम पानी,
जाकी अंग-अंग बास समानी,
प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥
प्रभु जी तुम मोती हम धागा,
जैसे सोनहिं मिलत सोहागा,
प्रभु जी तुम चँदन हम पानी,
जाकी अंग-अंग बास समानी,
प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥
प्रभु जी तुम दीपक हम बाती,
जाकी जोति बरै दिन राती,
प्रभु जी तुम चँदन हम पानी,
जाकी अंग-अंग बास समानी,
प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥
प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा,
ऐसी भक्ति करे ‘रैदासा’,
प्रभु जी तुम चँदन हम पानी,
जाकी अंग-अंग बास समानी,
प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥
श्याम खाटू वाले से मेरी पहचान हो गई - भजन (Shyam khatu wale se meri pahachan ho gai)
कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 34 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 34)
प्रभु जी तुम चंदन हम पानी,
जाकी अंग-अंग बास समानी,
प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥








