भजमन शंकर भोलेनाथ,
डमरू मधुर बजाने वाले,
डमरू मधुर बजाने वाले,
डमरू मधुर बजाने वाले,
भजमन शंकर भोलेंनाथ,
डमरू मधुर बजाने वाले ॥
मुक्ति हेतु बसाई काशी,
जहां रहे भोले अविनाशी,
विजया भोग लगाने वाले,
भजमन शंकर भोलेंनाथ,
डमरू मधुर बजाने वाले ॥
कर त्रिशूल पहिरे मृगछाला,
भोला ऐसा दीनदयाला,
बिगड़े काम बनाने वाले,
भजमन शंकर भोलेंनाथ,
डमरू मधुर बजाने वाले ॥
सकल मनोरथ पूरण कारी,
गिरजापति कैलाश बिहारी,
प्रभु महादेव कहाने वाले,
भजमन शंकर भोलेंनाथ,
डमरू मधुर बजाने वाले ॥
जो नित गान प्रभु का गावे,
सब सुख भोग परम पद पावे,
आवागमन छुड़ाने वाले,
भजमन शंकर भोलेंनाथ,
डमरू मधुर बजाने वाले ॥
तुलसी विवाह पौराणिक कथा (Tulsi Vivah Pauranik Katha)
भोले दी बरात: भजन (Bhole Di Baraat)
माँगा है भोलेनाथ से, वरदान एक ही: भजन (Manga Hai Bholenath Se Vardan Ek Hi)
भजमन शंकर भोलेनाथ,
डमरू मधुर बजाने वाले,
डमरू मधुर बजाने वाले,
डमरू मधुर बजाने वाले,
भजमन शंकर भोलेंनाथ,
डमरू मधुर बजाने वाले ॥








