
ना जी भर के देखा, ना कुछ बात की – भजन (Na Jee Bhar Ke Dekha Naa Kuch Baat Ki)
ना जी भर के देखा, ना कुछ बात की, बड़ी आरजू थी, मुलाकात की । करो दृष्टि अब तो प्रभु करुना की, बड़ी आरजू थी,

ना जी भर के देखा, ना कुछ बात की, बड़ी आरजू थी, मुलाकात की । करो दृष्टि अब तो प्रभु करुना की, बड़ी आरजू थी,

मुझे चरणों से लगाले, मेरे श्याम मुरली वाले । मेरी स्वास-स्वास में तेरा, है नाम मुरली वाले ॥ भक्तों की तुमने कान्हा, विपदा है टारी,

तेरे चरण कमल में श्याम, लिपट जाऊ राज बनके । लिपट जाऊ राज बनके, लिपट जाऊ राज बनके । तेरे चरण कमल में श्याम, लिपट

यशोमती नन्दन बृजबर नागर, गोकुल रंजन कान्हा, गोपी परण धन मदन मनोहर, कालिया दमन विधान । यशोमति नन्दन बृजबर नागर, गोकुल रंजन कान्हा ॥ अमलहरी

ब्रजराज ब्रजबिहारी, गोपाल बंसीवारे इतनी विनय हमारी, वृन्दा-विपिन बसा ले कितने दरों पे भटके, कितने ही दर बनाये अब तेरे हो रहें हैं, जायें न

मैं तो अपने श्याम की, दीवानी बन जाउंगी, दीवानी बन जाउंगी, मस्तानी बन जाउंगी, मैं तो अपने श्याम की, दिवानी बन जाउंगी । जब मेरे

श्याम रंग में रंग गई राधा, भूली सुध-बुध सारी रे, राधा के मन में, बस गए श्याम बिहारी ॥ श्याम नाम की चुनर ओढ़ी, श्याम
