
सब कुछ नहीं है पैसा – भजन (Sab Kuchh Nahi Hai Paisa)
है वो भी जरूरी पर सब कुछ नहीं है पैसा मकसद ऐ जिंदगी का क्यों रखलिया है पैसा पैसे से सिकंदर ने क्या क्या खरीद

है वो भी जरूरी पर सब कुछ नहीं है पैसा मकसद ऐ जिंदगी का क्यों रखलिया है पैसा पैसे से सिकंदर ने क्या क्या खरीद

महादेव शंकर हैं जग से निराले, बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले । मेरे मन के मदिर में रहते हैं शिव जी, यह मेरे नयन

मन में है विश्वास अगर जो, श्याम सहारा मिलता है, रोता है कोई श्याम का प्रेमी, रोता है कोई श्याम का प्रेमी, श्याम सिंघासन हिलता

राम को देख कर के जनक नंदिनी, बाग में वो खड़ी की खड़ी रह गयी । राम देखे सिया को सिया राम को, चारो अँखिआ

जो शिव नाम होठों पे चढ़ गयो रे, तो समझो ये जीवन संवर गयो रे ॥ मन में बसा ले तू शिव का शिवाला, साथ

शिवरात्रि, सावन के सोमवार, सोमवर, सोलह सोमवर, काँवड़, सावन के महिने मे अत्यधिक प्रयोग मे आने वाले शिव, शंकर, भोले, भोलेनाथ, महादेव एवं महाकाल के

श्री राम धुन में मन तू, जब तक मगन ना होगा, भव जाल छूटने का, तब तक जतन ना होगा ॥ व्यापार धन कमाकर, तू
