
जरी की पगड़ी बांधे, सुंदर आँखों वाला: भजन (Jari Ki Pagri Bandhe Sundar Ankhon Wala)
जरी की पगड़ी बांधे, सुंदर आँखों वाला, कितना सुंदर लागे बिहारी, कितना लागे प्यारा, जरी की पगड़ी बाँधे ॥ कानों में कुण्डल साजे, सिर मोर

जरी की पगड़ी बांधे, सुंदर आँखों वाला, कितना सुंदर लागे बिहारी, कितना लागे प्यारा, जरी की पगड़ी बाँधे ॥ कानों में कुण्डल साजे, सिर मोर

ज्योति कलश छलके ज्योति कलश छलके ज्योति कलश छलके ज्योति कलश छलके हुए गुलाबी, लाल सुनहरे रंग दल बादल के ज्योति कलश छलके घर आंगन

एक तू ही मेरा जग बेगाना, कन्हैया मेरी लाज रखना, मैने सब कुछ तुमको ही माना, कन्हैंया मेरी लाज रखना, एक तू ही मेरा जग

चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि, दुर्गा पूजा, गुप्त नवरात्रि, माता की चौकी, देवी जागरण, अष्टमी तथा शुक्रवार को गाए जाने वाले प्रसिद्ध माता के भजन।

श्याम सलोनो प्यारो म्हारो, मैं लुल लुल जावा मन को मोर्यो नाचन लाग्यो झूम झूम गावा , थारो दर्शन पाणे खातिर उड़ गयी आख्या श्यु

हरियालो महीनों, नाँचे यो मन मोर, मिळणे ख़ातिर देखो, साँवरियो खींचे डोर, मिळणे ख़ातिर देखो, साँवरियो खींचे डोर । हरियाली छाई बाबा, हिवड़ो लूभावै, परचम

आजा कलयुग में लेके अवतार ओ गोविन्द आजा कलयुग में लेके अवतार ओ गोविन्द अपने भगतो की सुन ले पुकार ओ गोविन्द अपने भगतो की
