
प्रभु राम का सुमिरन कर – भजन (Prabhu Ram Ka Sumiran Kar)
प्रभु राम का सुमिरन कर, हर दुःख मिट जाएगा, यही राम नाम तुझको, भव पार लगाएगा ॥ मिथ्या जग में कबसे, तू पगले रहा है

प्रभु राम का सुमिरन कर, हर दुःख मिट जाएगा, यही राम नाम तुझको, भव पार लगाएगा ॥ मिथ्या जग में कबसे, तू पगले रहा है

श्री रामायण प्रारम्भ स्तुति, जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन ॥ करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन ॥ 1 ॥ मूक

शबरी तुम्हरी बाट निहारे, वो तो रामा रामा पुकारे, कब आओगे मेरे राम, शबरी रो रो तुम्हे पुकारे, वो तो तुम्हरी बाट निहारे, जल्दी आ

तन रंगा मेरा मन रंगा, इस रंग में अंग अंग रंगा, सीता जी के रंग में, राम जी रंग में, राधेश्याम जी रंग में, तन

राम का प्यारा है, सिया दुलारा है, संकट हारा है, हनुमान हनुमान, हनुमान हनुमान, तीनो लोको में, सारे देवों में, सबसे न्यारा है, हनुमान हनुमान,

लाल लंगोटे वाले वीर हनुमान है, हनुमान गढ़ी में बैठे, अयोध्या की शान है, लाल लंगोटे वालें वीर हनुमान है ॥ बजरंगी का हूँ मैं

एक दिन बोले प्रभु रामचंद्र, मैं मन की बात बताता हूँ, तुम लेटे रहो हनुमान यहाँ, मैं तेरे चरण दबाता हूँ ॥ श्री राम जय
