
ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां – भजन (Thumak Chalat Ramchandra)
ठुमक चलत रामचंद्र, ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां, ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां, ठुमक चलत रामचंद्र किलकि-किलकि उठत धाय किलकि-किलकि उठत धाय, गिरत भूमि लटपटाय

ठुमक चलत रामचंद्र, ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां, ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां, ठुमक चलत रामचंद्र किलकि-किलकि उठत धाय किलकि-किलकि उठत धाय, गिरत भूमि लटपटाय

देखो पावन परम श्री राम के चरण, श्री राम के चरण, प्रभु राम के चरण, देखों पावन परम श्री राम के चरण ॥ श्री राम

राम नाम ना गाया तूने, बस माया ही जोड़ी, राम नाम के सिवा साथ ना, जाएं फूटी कौड़ी, जय श्री राम, जय श्री राम, जय

राम जन्मभूमि पर जाकर, जीत के दीप जलाएंगे, कलयुग के रावण अब भय से, अपनी खैर मनाएंगे ॥ राम अयोध्या जब लौटे, जले थे दीपक

परम पूज्य संत श्री डोंगरे जी महाराज कहा करते थे जिन परिवारों मे अयोध्या काण्ड के मंगलाचरण की यह चौपाईयाँ प्रतिदिन गाई, सुनी और आचरण

यह स्तुति भगवान शिव द्वारा प्रभु राम के अयोध्या वापस आपने के उपलक्ष्य में गाई गई है। जिसके अंतर्गत सभी ऋषिगण, गुरु, कुटुम्बी एवं अयोध्या

रघुपति राघव राजाराम । पतितपावन सीताराम ॥ जय रघुनन्दन जय घनश्याम । पतितपावन सीताराम ॥ भीड़ पड़ी जब भक्त पुकारे । दूर करो प्रभु दु:ख
