
माखन खा गयो माखनचोर: भजन (Makhan Kha Gayo Makhan Chor)
नटखट नटखट नंदकिशोर, माखन खा गयो माखनचोर, पकड़ो पकड़ो दौड़ो दौड़ो, कान्हा भागा जाये, कभी कुंज में, कभी कदम पे, हाथ नहीं ये आये, गोकुल

नटखट नटखट नंदकिशोर, माखन खा गयो माखनचोर, पकड़ो पकड़ो दौड़ो दौड़ो, कान्हा भागा जाये, कभी कुंज में, कभी कदम पे, हाथ नहीं ये आये, गोकुल

बात हमारी बड़े पते की, गौर होना चाहिये, आ गया फागुन मेला, अब तो शोर होना चाहिये, बात हमारी बड़े पते की ॥ रंग रंगीला

ओ मोरछड़ी वाले, कब तक तेरी राह तकूँ, लाज बचा ले बाबा, हारे का सहारा तू ॥ कैसे कहूं तुझे, कितना मैं चाहूँ, हर पल

मेरी पूजा को सफल बनाओ, तुम बनाओ, गणराज गजानन आओ, गणराज गजानन आओ ॥ खजराना से पधारो जी गजानन, चिंतामन से पधारो जी गजानन, रिद्धि

गाइये गणपति सुबहो शाम, मंगलमूर्ति मंगलकारी, पावनकारी तेरो नाम, गाइये गणपति सुबहों शाम ॥ रिद्धि सिद्धि के तुम ही ज्ञाता, तुम ही देते विद्या ज्ञान,

जय हो तेरी गणराज गजानन ॥ दोहा – प्रथमें गौरा जी को वंदना, द्वितीये आदि गणेश, तृतीये सिमरा माँ शारदा, मेरे काटो सकल कलेश ॥

गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ, गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ, मेरे मुरलीधर माधव, मेरे मुरलीधर माधव, नंदलाल चले आओ, गोविंद चले आओ, गोपाल
