
बांके बिहारी की देख छटा – भजन (Banke Bihari Ki Dekh Chhata)
बांके बिहारी की देख छटा, मेरो मन है गयो लटा पटा। कब से खोजूं बनवारी को, बनवारी को, गिरिधारी को। कोई बता दे उसका पता,

बांके बिहारी की देख छटा, मेरो मन है गयो लटा पटा। कब से खोजूं बनवारी को, बनवारी को, गिरिधारी को। कोई बता दे उसका पता,

आज मिल्या मौका, भोले के दर्शन पाने का, नीलकण्ठ पै चाल नही, कोए काम उलहाणे का ॥ हर की पौड़ी जाकै न, हम गंगा जी

शिव में मिलना है ॥ दोहा – कितना रोकूं मन के शोर को, ये कहा रुकता है, की शोर से परे, उस मौन से मिलना

गणपति राखो मेरी लाज, गणपति राखो मेरी लाज, पूरण करियो मेरे काज, गणपति राखो मेरी लाज, गणपति राखो मेरी लाज । सदा रहो खुशहाल, गणपति

दास तेरे है गजानन, ध्यान धरते है, तेरे चरणों में प्रभु, प्रणाम करते है, तेरे चरणों में प्रभु, प्रणाम करते है ॥ चार तेरी है

गौरी सूत गणराज पधारो, आके सारे काज सवारों, तुझको आना होगा, तुझको आना होगा ॥ सारे देवो में पहले तुझको मनाये, तू ही दयालु सारे

॥ श्लोक ॥ गजानंद आनंद करो, दो सुख सम्पति में शीश, दुश्मन को सज्जन करो, निवत जिमावा खीर । सदा भवानी दाहिनी, सनमुख रहत गणेश,
