
मुझे कौन जानता था तेरी बंदगी से पहले: भजन (Mujhe Kaun Poochhta Tha Teri Bandagi Se Pahle)
मुझे कौन जानता था, तेरी बंदगी से पहले, मैं बुझा हुआ दिया था, तेरी बंदगी से पहले ॥ मैं तो खाख था जरा सी, मेरी

मुझे कौन जानता था, तेरी बंदगी से पहले, मैं बुझा हुआ दिया था, तेरी बंदगी से पहले ॥ मैं तो खाख था जरा सी, मेरी

प्रेम हो तो श्री हरि का प्रेम होना चाहिए जो बने विषयों के प्रेमी उनको रोना चाहिए मखमली गद्दे पे सोये ऐश और आराम से

जिनके हृदय हरि नाम बसे, तिन और का नाम लिया ना लिया । जिनके हृदय हरि नाम बसे, जिन के द्वारे पर गंग बहे, जिन

राम सीता और लखन वन जा रहे, हाय अयोध्या में अँधेरे छा रहे, राम सीता और लखन वन जा रहे ॥ मुर्ख कैकई ने किया

सीता राम जी के आरती उतारूँ ए सखी केकरा के राम बबुआ केकरा के लछुमन केकरा के भरत भुवाल ए सखी सीता राम जी के

हर घडी भोले दिल में, रहा कीजिये, चरणों में प्रभु जी, जगह दीजिये, हर घड़ी भोले दिल में, रहा कीजिये ॥ जो भी शरण में

कर दो दुखियो का दुःख दूर, ओ बाघम्बर वाले, कर दो प्रभुजी बेड़ा पार, ओ शिव शंकर भोले ॥ कोई चढ़ावे शिव जी जल की
