हर घडी भोले दिल में,
रहा कीजिये,
चरणों में प्रभु जी,
जगह दीजिये,
हर घड़ी भोले दिल में,
रहा कीजिये ॥
जो भी शरण में आया तुम्हारी,
उसको प्रभु जी निभाया,
जो भी शरण में आया तुम्हारी,
उसको प्रभु जी निभाया,
मुझको भी निभाना,
वचन दीजिये,
हर घड़ी भोले दिल में,
रहा कीजिये ॥
मुझे क्या पता है हे मेरे मालिक,
कैसे भला हो हमारा,
मुझे क्या पता है हे मेरे मालिक,
कैसे भला हो हमारा,
जो भी आप चाहे वही कीजिये,
हर घड़ी भोले दिल में,
रहा कीजिये ॥
जो भी किया है कैसे बताऊँ,
बताने के लायक नहीं है,
जो भी किया है कैसे बताऊँ,
बताने के लायक नहीं है,
बालक हूँ तुम्हारा क्षमा कीजिये,
हर घड़ी भोले दिल में,
रहा कीजिये ॥
‘बनवारी’ मेरी कोशिश यही है,
तुमको मैं अपना बना लूँ,
‘बनवारी’ मेरी कोशिश यही है,
तुमको मैं अपना बना लूँ,
कोशिश ये हमारी सफल कीजिये,
हर घड़ी भोले दिल में,
रहा कीजिये ॥
कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 35 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 35)
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हर घडी भोले दिल में,
रहा कीजिये,
चरणों में प्रभु जी,
जगह दीजिये,
हर घड़ी भोले दिल में,
रहा कीजिये ॥








