
भक्ति का दीप मन में जलाये रखना: भजन (Bhakti Ka Deep Man Me Jalaye Rakhna)
भक्ति का दीप मन में जलाये रखना, प्रभु चरणों में मुझको बिठाये रखना, भक्ति का दीप मन में जलाए रखना ॥ मेरे नैनो को दर्शन

भक्ति का दीप मन में जलाये रखना, प्रभु चरणों में मुझको बिठाये रखना, भक्ति का दीप मन में जलाए रखना ॥ मेरे नैनो को दर्शन

आंख फरुके बोले कागलियो, म्हारो हरसे छे हिवड़ो आज, सांवरियो आवेलो, म्हारो हरसे छे हिवड़ो आज, सांवरियो आवैलो, आंख फरुके बोले कागलियो ॥ मनड़े रो

अवध में छाई खुशी की बेला, अवध में छाई खुशी की बेला, लगा है, अवध पुरी में मेला । चौदह साल वन में बिताएं, राम

मैं तो ओढली चुनरियाँ थारे नाम री, थारे नाम री थारे नाम री, मैं तो ओढली चुनरियाँ थारे नाम री, श्याम नाम की ओढ़ चुनरियाँ

पूरन ब्रह्म पूरन ज्ञान है घाट माई, सो आयो रहा आनन्द और सुनी मुनि जन, पढ़त वेद शास्त्र अंग मारी जनम गोकुल मे घटे मिटत

हर भक्तों के दिल से निकले, एक यही आवाज़, ये बाबा बहुत बड़ा है, ये बाबा बहुत बड़ा हैं ॥ बाबा की शक्ति ने देखों,

भजमन राम चरण सुखदाई, भजमन राम चरण सुखदाई ॥ जिहि चरननसे निकसी सुरसरि संकर जटा समाई । जटासंकरी नाम परयो है त्रिभुवन तारन आई ॥
