
खोलो समाधी भोले शंकर, मुझे दरश दिखाओ: भजन (Kholo Samadhi Bhole Shankar Mujhe Darsh Dikhao)
खोलो समाधी भोले शंकर, मुझे दरश दिखाओ, इस जग की झूठी माया, से मुझको बचाओ, खोलो समाधि भोले शंकर, मुझे दरश दिखाओ ॥ शिव शिव

खोलो समाधी भोले शंकर, मुझे दरश दिखाओ, इस जग की झूठी माया, से मुझको बचाओ, खोलो समाधि भोले शंकर, मुझे दरश दिखाओ ॥ शिव शिव

म्हारा उज्जैन का महाराजा ने, खम्मा रे खम्मा, भक्तां लाडीला महाकाल जी ने, खम्मा रे खम्मा, खम्मा रे खम्मा घणी रे खम्मा, म्हारां उज्जैन का

शिव के रूप में आप विराजे, भोला शंकर नाथ जी ॥ श्लोक – सौराष्ट्रे सोमनाथं च, श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्, उज्जयिन्यां महाकाल, ओमकारम ममलेश्वरम्। परल्यां वैजनाथं च,

यह भजन 15वीं सदी में गुजराती भक्तिसाहित्य के श्रेष्ठतम कवि नरसी मेहता द्वारा मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखा गया है। यह भजन उसी

हे शिव भोले मुझ पर, दो ऐसा रंग चढ़ाय, रोम रोम मेरा शिव बोले, मन बोले नमः शिवाय ॥ हे शिव शंकर हे करुणाकर, हे

सबना दा रखवाला ओ शिवजी डमरूवाला जी डमरू वाला उपर कैलाश रहंदा भोले नाथ जी शंभु… धर्मियो जो तारदे शिवजी पापिया जो मारदा जी पापिया

भजन करो मित्र मिला, आश्रम नरतन का । श्वास की सुमिरिनी है, मन को बना मनका ॥ भजन करो मित्र मिला, आश्रम नरतन का ।
