म्हारा उज्जैन का महाराजा ने,
खम्मा रे खम्मा,
भक्तां लाडीला महाकाल जी ने,
खम्मा रे खम्मा,
खम्मा रे खम्मा घणी रे खम्मा,
म्हारां उज्जैन का महाराजा ने,
खम्मा रे खम्मा ॥
ओ बाबा उज्जैन ने खम्मा,
मैया क्षिप्रा जी ने खम्मा,
बाबा राम घाट ने खम्मा,
म्हारां उज्जैन का महाराजा ने,
खम्मा रे खम्मा,
भक्तां लाडीला महाकाल जी ने,
खम्मा रे खम्मा ॥
मंगल नाथ जी ने खम्मा,
त्रिशूल हाथ जी ने खम्मा,
भैरव घाट जी ने खम्मा,
डम डम डमरू जी री ताल बोले,
खम्मा रे खम्मा,
म्हारां उज्जैन का महाराजा ने,
खम्मा रे खम्मा,
भक्तां लाडीला महाकाल जी ने,
खम्मा रे खम्मा ॥
भोले नाथ जी ने खम्मा,
मैया हरसिद्धि ने खम्मा,
बाबा भैरव जी ने खम्मा,
भक्ता आवे थारा द्वार करता,
खम्मा रे खम्मा,
म्हारा उज्जैन का महाराजा ने,
खम्मा रे खम्मा,
भक्तां लाडीला महाकाल जी ने,
खम्मा रे खम्मा ॥
भक्तो ने दर्शन दे दीजो,
मेरे भोलेनाथ जी,
भोलेनाथ मेरे शम्भुनाथ जी,
भोलेनाथ मेरे शम्भुनाथ जी,
भक्तो ने दर्शन दे दीजो,
मेरे भोलेनाथ जी ॥
जाम्भोजी के द्वारा बताये गए विश्नोई समाज के प्रश्न तथा उत्तर
गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय - भजन (Govind Jai Jai, Gopal Jai Jai)
जम्भेश्वर आरती: ओ३म् शब्द सोऽहं ध्यावे (Jambheshwar Aarti Om Shabd Sohan Dhyave)
दर्शन करने दूर से आयो,
आस दरश की मन में लायो,
दर्शन भीख मने दे दीजो,
मेरे भोलेनाथ जी ॥
महाकाल मेरे दुःख हर लीजो,
प्रभु आज खड़ा हूँ द्वार तेरे,
प्रभु आज खड़ा हूँ द्वार तेरे ॥








