
श्री हनुमान बाहुक (Shri Hanuman Bahuk)
एक बार गोस्वामी तुलसीदासजी को वात-व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई थी और फोड़े-फुंसियों के कारण सारा शरीर वेदना का स्थान-सा बन गया था। औषध,

एक बार गोस्वामी तुलसीदासजी को वात-व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई थी और फोड़े-फुंसियों के कारण सारा शरीर वेदना का स्थान-सा बन गया था। औषध,

पूरन ब्रह्म पूरन ज्ञान है घाट माई, सो आयो रहा आनन्द और सुनी मुनि जन, पढ़त वेद शास्त्र अंग मारी जनम गोकुल मे घटे मिटत

भइ प्रगट किशोरी, धरनि निहोरी, जनक नृपति सुखकारी । अनुपम बपुधारी, रूप सँवारी, आदि शक्ति सुकुमारी । मनि कनक सिंघासन, कृतवर आसन, शशि शत शत

श्रीमन्नारायण नारायण नारायण नारायण ।टेक। लक्ष्मीनारायण नारायण नारायण नारायण बद्रीनारायण नारायण नारायण नारायण मुक्तिनारायण नारायण नारायण नारायण सत्यनारायण नारायण नारायण नारायण गोदानारायण नारायण नारायण नारायण

हर भक्तों के दिल से निकले, एक यही आवाज़, ये बाबा बहुत बड़ा है, ये बाबा बहुत बड़ा हैं ॥ बाबा की शक्ति ने देखों,

परिवार मेरा मैया, करता है तेरी भक्ति, भक्ति से सदा मिलती, तेरे भक्तों को माँ शक्ति ॥ इच्छा से मैया तेरी, होता यहां सवेरा, हम

भजमन राम चरण सुखदाई, भजमन राम चरण सुखदाई ॥ जिहि चरननसे निकसी सुरसरि संकर जटा समाई । जटासंकरी नाम परयो है त्रिभुवन तारन आई ॥
