
नैया चलाती हूँ, मैं बिगड़ी बनाती हूँ: भजन (Naiya Chalati Hu Main Bigadi Banati Hu)
नैया चलाती हूँ, मैं बिगड़ी बनाती हूँ, अपने भक्तो का मैं, बेड़ा पार लगाती हूँ, नईया चलाती हूँ ॥ शरण जो मेरी आकर के, भरोसा

नैया चलाती हूँ, मैं बिगड़ी बनाती हूँ, अपने भक्तो का मैं, बेड़ा पार लगाती हूँ, नईया चलाती हूँ ॥ शरण जो मेरी आकर के, भरोसा

साथी हारे का तू, मुझको भी श्याम जीता दे, मेरा ये नसीबा भी, सोया है जगा दे, साथी हारें का तू, मुझको भी श्याम जीता

आजु मिथिला नगरिया निहाल सखिया, चारों दुलहा में बड़का कमाल सखिया! शिश मणी मौरिया, कुण्डल सोहे कनमा, कारी कारी कजरारी जुलमी नयनमा, लाल चंदन सोहे

राजी राजी राखो बाबा, फिर थारे दर पे आवा जी, भूल चूक म्हारी माफ़ करो फिर, थारा दर्शन पावां जी, राजी राजी राखों बाबा, फिर

म्हारा घट मा बिराजता, श्रीनाथजी यमुनाजी महाप्रभुजी, म्हारो मनड़ो है गोकुल वृन्दावन, म्हारे तन रो आंगणियों है तुलसी नवल, म्हारा प्राण जीवन, मारा घट मा

तूने सिर पे धरा जो मेरे हाथ, के अब तेरा साथ नहीं छूटे, मेरा तुम पे रहे विश्वास, के अब तेरा साथ नहीं छूटे, तूने

तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥ तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा
