
गोपाल गोकुल वल्लभे, प्रिय गोप गोसुत वल्लभं (Gopal Gokul Valbhe Priya Gop Gosut Valbham)
गोपाल गोकुल वल्लभे, प्रिय गोप गोसुत वल्लभं । चरणारविन्दमहं भजे, भजनीय सुरमुनि दुर्लभं ॥ घनश्याम काम अनेक छवि, लोकाभिराम मनोहरं । किंजल्क वसन किशोर मूरति,

गोपाल गोकुल वल्लभे, प्रिय गोप गोसुत वल्लभं । चरणारविन्दमहं भजे, भजनीय सुरमुनि दुर्लभं ॥ घनश्याम काम अनेक छवि, लोकाभिराम मनोहरं । किंजल्क वसन किशोर मूरति,

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में, है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में ॥ मेरा निश्चय है

मुकुन्द माधव गोविन्द बोल । केशव माधव हरि हरि बोल ॥ राम राम बोल, राम राम बोल । शिव शिव बोल, शिव शिव बोल ॥

राम का सुमिरन किया करो, प्रभु के सहारे जिया करो जो दुनिया का मालिक है, नाम उसी का लिया करो राम का सुमिरन किया करो,

सत नाम का सुमिरन कर ले, कल जाने क्या होय, जाग जाग नर निज आश्रम में, काहे बिरथा सोय, काहे बिरथा सोय, सतनाम का सुमिरन

जिस घर में मैया का, सुमिरन होता, उस घर में हर पल, आनंद होता, माँ का पावन नाम बड़ा, मन भावन होता, जिस घर में

जय महाकाली शेरावाली, सारे जग की तू रखवाली, तेरे दर पे आने का सजदा करूँ, तेरी याद माँ मुझको आने लगी, जय महाकाली शेरोवाली, सारे
