
जगमग जगमग जोत जली है, आरती श्री राम जी (Jagmag Jyot Jali Hai Shri Ram Aarti)
श्री राम नवमी, विजय दशमी, सुंदरकांड, रामचरितमानस कथा और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से गाये जाने वाला भजन/आरती। जगमग जगमग जोत जली है।

श्री राम नवमी, विजय दशमी, सुंदरकांड, रामचरितमानस कथा और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से गाये जाने वाला भजन/आरती। जगमग जगमग जोत जली है।

मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना । तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया ठिकाना ॥ मुझे कौन जानता था, तेरी

श्रद्धा रखो जगत के लोगो, अपने दीनानाथ में । लाभ हानि जीवन और मृत्यु, सब कुछ उस के हाथ में ॥ मारने वाला है भगवान,

सुख के सब साथी, दुःख में ना कोई । मेरे राम, मेरे राम.. तेरा नाम एक साँचा, दूजा ना कोई ॥ जीवन आनी जानी छाया,

जिसकी लागी रे लगन भगवान में, उसका दिया रे जलेगा तूफान में। जिसकी लागी रे लगन भगवान में, उसका दिया रे जलेगा तूफान में। तन

क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी, अब तक के सारे अपराध धो डालो तन की चादर को, लगे है उसमे जो भी दाग ॥ क्षमा करो

गौरा ढूंढ रही पर्वत पर, शिव को पति बनाने को, पति बनाने को, भोले को, पति बनाने को, गौरा ढूंढ रही पर्वत पे, शिव को
