बन्दे तेरा रे नही रे ठिकाना,
एक ना एक रोज,
पडे़गा तुझे जाना रे,
बन्दें तेरा रे नहीं रे ठिकाना ॥
बीत गया बचपन ढली रे जवानी,
आया रे बुढ़ापा देख रोया रे प्राणी,
बदल गया रे सब होके पुराना रे,
बन्दें तेरा रे नहीं रे ठिकाना ॥
जैसा करा है तुने वैसा ही भरा है,
गीता के पन्नो में ये सब लिखा है,
मोह ममता से मन को हटाना रे,
बन्दें तेरा रे नहीं रे ठिकाना ॥
दुनिया को कहते हो ये सब हमारे,
साथ जाये ना तेरे महल चोबारे,
खाली आया जग में खाली हाथ जाना रे,
बन्दें तेरा रे नहीं रे ठिकाना ॥
राव राजेंदर मन में विचारा,
दिन बन्धु दीनानाथ एक है सहारा,
सिमरन करके मुक्ति को पाना रे,
बन्दें तेरा रे नहीं रे ठिकाना ॥
BhaktiBharat Lyrics
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बन्दे तेरा रे नही रे ठिकाना,
एक ना एक रोज,
पडे़गा तुझे जाना रे,
बन्दें तेरा रे नहीं रे ठिकाना ॥








