एक नज़र बस एक नज़र,
हम पे मोहन वार दे,
ज़िन्दगी की डगमगाती,
मेरी नैया तार दे ॥
स्वांस की हर तार पर,
कृष्ण तेरा नाम है,
मैं जिधर देखु तुझे,
तू ही तू घनश्याम है,
इस जगत के तू बंधनो से,
तू हमे उद्धार दे,
एक नजर बस एक नजर,
हम पे मोहन वार दे,
ज़िन्दगी की डगमगाती,
मेरी नैया तार दे ॥
हर समय चिंतन तुम्हारा,
हर समय तेरा भजन,
खोजते रहते है तुमको,
हर पहर मेरे नयन,
और ना प्रभु देर कर तू,
हमको तू दीदार दे,
एक नजर बस एक नजर,
हम पे मोहन वार दे,
ज़िन्दगी की डगमगाती,
मेरी नैया तार दे ॥
मै पुजारी हूँ तुम्हारा,
जन्मो जन्मो तक रहूं,
इस जगत के बंधनों में,
ना कभी फस कर गिरू,
मै रहू बन कर तुम्हारा,
ऐसा वर सरकार दे,
एक नजर बस एक नजर,
हम पे मोहन वार दे,
ज़िन्दगी की डगमगाती,
मेरी नैया तार दे ॥
तू दिखादे सांवरी
सूरत हमे ओ सांवरे,
खोजते रहते है तूझको,
मेरे नैना बाबरे,
कब तलक तरसेगा ‘राजेन्द्र’
तू हमे दिदार दे,
एक नजर बस एक नजर,
हम पे मोहन वार दे,
ज़िन्दगी की डगमगाती,
मेरी नैया तार दे ॥
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 14 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 14)
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एक नज़र बस एक नज़र,
हम पे मोहन वार दे,
ज़िन्दगी की डगमगाती,
मेरी नैया तार दे ॥
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