आए हैं प्रभु श्री राम,
भरत फूले ना समाते हैं ।
आए हैं प्रभु श्री राम,
भरत फूले ना समाते हैं ।
तन पुलकित मुख बोल ना आए,
प्रभु पद कमल रहे हिए लाये ।
भूमि पड़े हैं भरत जी,
उन्हें रघुनाथ उठाते हैं ॥
आए हैं प्रभु श्री राम,
भरत फूले ना समाते हैं ।
आए हैं प्रभु श्री राम,
भरत फूले ना समाते हैं ।
प्रेम सहित निज हिय से लगाए,
नैनो में तब जल भर आए ।
मिल के गले चारों भैया,
खुशी के आंसू बहाते हैं ॥
आए हैं प्रभु श्री राम,
भरत फूले ना समाते हैं ।
आए हैं प्रभु श्री राम,
भरत फूले ना समाते हैं ।
अब ना बानी तो फिर ना बनेगी - भजन (Ab Naa Banegi Too Phir Na Banegi)
कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 20 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 20)
क्रोधात् भवति संमोहः (Krodhad Bhavati Sammohah)
नर नारी सब मंगल गावे,
नव से सुमन देव बरसावे ।
भक्त सभी जन मिलके,
अवध में दीपक जलाते हैं ॥
आए हैं प्रभु श्री राम,
भरत फूले ना समाते हैं ।
आए हैं प्रभु श्री राम,
भरत फूले ना समाते हैं ।








