तर जाएगा ले नाम राम का,
कहीं बीत ना जाए,
ये जीवन काम का,
तर जायेगा ले नाम राम का ॥
राम नाम के दो शब्दों की,
महिमा है बड़ी भारी,
पत्थर पे जब चरण पड़े तो,
पल में बन गई नारी,
चख ले तू अमृत,
हरि के नाम का,
तर जायेगा ले नाम राम का ॥
राम नाम में जादू ऐसा,
तीर जाते है पत्थर,
राम नाम से कट जाते है,
लख चौरासी चक्कर,
सुमिरन तू करले,
हरि के नाम का,
तर जायेगा ले नाम राम का ॥
लूट मची है लुटले बन्दे,
राम नाम की मस्ती,
‘हर्ष’ कहे महँगी दुनिया में,
चीज यही है सस्ती,
चोला पहन ले,
हरि के नाम का,
तर जायेगा ले नाम राम का ॥
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 1 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 1)
बोला प्रभु से यूँ केवट, यह विनती है सरकार: भजन (Bola Prabhu Se Yun Kevat Yah Vinati Hai Sarkar)
शंकर तेरी जटा से बहती है गंग धारा - भजन (Shankar Teri Jata Se Behti Hai Gang Dhara)
तर जाएगा ले नाम राम का,
कहीं बीत ना जाए,
ये जीवन काम का,
तर जायेगा ले नाम राम का ॥








