श्री चित्रगुप्त स्तुति (Shri Chitragupt Stuti)

जय चित्रगुप्त यमेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ।
जय पूज्यपद पद्मेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥
जय देव देव दयानिधे, जय दीनबन्धु कृपानिधे ।
कर्मेश जय धर्मेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥

जय चित्र अवतारी प्रभो, जय लेखनीधारी विभो ।
जय श्यामतम, चित्रेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥

पुर्वज व भगवत अंश जय, कास्यथ कुल, अवतंश जय ।
जय शक्ति, बुद्धि विशेष तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥

जय विज्ञ क्षत्रिय धर्म के, ज्ञाता शुभाशुभ कर्म के ।
जय शांति न्यायाधीश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥

जय दीन अनुरागी हरी, चाहें दया दृष्टि तेरी ।
कीजै कृपा करूणेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥

कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 33 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 33)

गणेश भजन (Ganesh Bhajan)

था बिन दीनानाथ आंगली कुण पकड़सी जी - भजन (Tha Bin Dheenanath Aangli Kun Pakadsi Ji)

तब नाथ नाम प्रताप से, छुट जायें भव, त्रयताप से ।
हो दूर सर्व कलेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥

जय चित्रगुप्त यमेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ।
जय पूज्य पद पद्येश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥

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Sandeep Bishnoi

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