जय चित्रगुप्त यमेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ।
जय पूज्यपद पद्मेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥
जय देव देव दयानिधे, जय दीनबन्धु कृपानिधे ।
कर्मेश जय धर्मेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥
जय चित्र अवतारी प्रभो, जय लेखनीधारी विभो ।
जय श्यामतम, चित्रेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥
पुर्वज व भगवत अंश जय, कास्यथ कुल, अवतंश जय ।
जय शक्ति, बुद्धि विशेष तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥
जय विज्ञ क्षत्रिय धर्म के, ज्ञाता शुभाशुभ कर्म के ।
जय शांति न्यायाधीश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥
जय दीन अनुरागी हरी, चाहें दया दृष्टि तेरी ।
कीजै कृपा करूणेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥
गुरु आसन समराथल भाग 3 ( Samarathal Dhora )
दुर्गा पूजा पुष्पांजली (Durga Puja Pushpanjali)
तीनो लोको में भोले के जैसा: भजन (Tino Loko Mein Bhole Ke Jaisa)
तब नाथ नाम प्रताप से, छुट जायें भव, त्रयताप से ।
हो दूर सर्व कलेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥
जय चित्रगुप्त यमेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ।
जय पूज्य पद पद्येश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥








