विद्यां ददाति विनयं,
विनयाद् याति पात्रताम् ।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति,
धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥
हिन्दी भावार्थ:
विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन आता है, धन से धर्म होता है, और धर्म से सुख प्राप्त होता है।
तूने जीना सिखाया भोलेनाथ जी: भजन (Tune Jeena Sikhaya Bholenath Ji)
निर्माण कालीन समराथल ........समराथल कथा भाग 16
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