स्वस्ति: प्रजाभ्यः परिपालयंतां
न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः ।
गो ब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं
लोकाः समस्ताः सुखिनोभवंतु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ।
लोकक्षेम मंत्र | सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का मंत्र
जाम्भोजी का जैसलमेर पधारना भाग 1
वरलक्ष्मी व्रत कथा (Varalakshmi Vrat Katha)
स्वीकार हमें करले, हम दुखड़ो के मारे है - भजन (Swikar Hame Karle Ham Dukhdo Ke Maare Hai)
Post Views: 1,157








