नम ॐ विष्णु-पादाय कृष्ण-प्रेष्ठाय भूतले
श्रीमते भक्तिवेदांत-स्वामिन् इति नामिने ।
नमस्ते सारस्वते देवे गौर-वाणी-प्रचारिणे
निर्विशेष-शून्यवादि-पाश्चात्य-देश-तारिणे ॥
राम रस बरस्यो री, आज म्हारे आंगन में (Ram Ras Barsyo Re, Aaj Mahre Angan Main)
श्री गुरु जम्भेश्वर से उतरकालिन समराथल .......(-: समराथल कथा भाग 14:-)
मुश्किल करे आसान जो, वो नाम तो हनुमान है: भजन (Mushkil Kare Aasan Jo Vo Naam To Hanuman Hai)
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