हे जग स्वामी, अंतर्यामी,
तेरे सन्मुख आता हूँ ।
सन्मुख आता, मैं शरमाता
भेंट नहीं कुछ लाता हूँ
॥ हे जग स्वामी…॥
पापी जन हूँ, मैं निर्गुण हूँ
द्वार तेरे पर आता हूँ
॥ हे जग स्वामी…॥
मुझ पर प्रभु कृपा कीजे
पापों से पछताता हूँ
॥ हे जग स्वामी…॥
पाप क्षमा कर दीजे मोरे,
मन से ये ही चाहता हूँ
॥ हे जग स्वामी…॥
झूला पड्यो है कदम्ब की डार - भजन (Jhula Padyo Hai Kadamb Ki Daar)
बालाजी ने ध्याले तू: भजन (Balaji Ne Dhyale Tu)
हे जग स्वामी, अंतर्यामी,
तेरे सन्मुख आता हूँ ।
Post Views: 303








