
सर्व भयानक रोग नाशक मंत्र (Sarv Bhayanak Rog Nashak Mantra)
यह मंत्र जैन समाज के प्रसिद्ध भक्तामर स्तोत्र का 45वाँ मंत्र है जिसके श्रवण एवं जाप से भयंकर जलोदर रोगों का नाश होता है। अतः

यह मंत्र जैन समाज के प्रसिद्ध भक्तामर स्तोत्र का 45वाँ मंत्र है जिसके श्रवण एवं जाप से भयंकर जलोदर रोगों का नाश होता है। अतः

॥ विनियोग मन्त्र ॥ ॐ अस्य श्रीबृहस्पति स्तोत्रस्य गृत्समद् ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, बृहस्पतिर्देवता, बृहस्पति प्रीत्यर्थे जपे विनियोग: गुरुर्बृहस्पतिर्जीव: सुराचार्यो विदां वरः । वागीशो धिषणो दीर्घश्मश्रुः

श्री कुबेर अष्टोत्तर शतनामावली – 108 नाम ॐ कुबेराय नमः ॥ ॐ धनदाय नमः ॥ ॐ श्रीमाते नमः ॥ ॐ यक्षेशाय नमः ॥ ॐ गुह्यकेश्वराय

यह दीप प्रज्वलन का मंत्र है, तथा इसे दीप दर्शन मंत्र भी कहा जा सकता है। शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा । शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योति नमोऽस्तुते

श्री गौ अष्टोत्तर नामावलि – गौ माता के 108 नाम ॐ कपिला नमः । ॐ गौतमी नमः । ॐ सुरभी नमः । ॐ गौमती नमः

॥ अथ मंगलाष्टक मंत्र ॥ ॐ श्री मत्पंकजविष्टरो हरिहरौ, वायुमर्हेन्द्रोऽनलः। चन्द्रो भास्कर वित्तपाल वरुण, प्रताधिपादिग्रहाः । प्रद्यम्नो नलकूबरौ सुरगजः, चिन्तामणिः कौस्तुभः, स्वामी शक्तिधरश्च लांगलधरः, कुवर्न्तु

॥ श्रीतुलसी अष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॐ श्री तुलस्यै नमः । ॐ नन्दिन्यै नमः । ॐ देव्यै नमः । ॐ शिखिन्यै नमः । ॐ धारिण्यै नमः ।
