
जय गणेश गणनाथ दयानिधि – भजन (Jai Ganesh Gananath Dayanidhi)
गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥ जय गणेश गणनाथ दयानिधि, सकल विघन कर दूर हमारे, जय गणेश

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥ जय गणेश गणनाथ दयानिधि, सकल विघन कर दूर हमारे, जय गणेश

आओ गणनायक राजा, तेरी दरकार है, देखो ये माँ साँचल का, सच्चा दरबार है, देखो ये माँ गौरा का, प्यारा सा लाल है ॥ सबसे

गुणवान मेरे गणपति बुद्धि के है दाता है मेरे दाता सबके दाता भाग्यविधाता । मेरे दाता,मेरे दाता, मेरे दाता, मेरे दाता है मेरे दाता सबके

प्रीत मे पूजे नाम तुम्हारा, गणपति जगत खिवैया, शिव नँदन अब आज हमारी, पार लगाना नैय्या, जय गौरी के लाला ॥ खजराना मे आन बिराजे,

सबसे पहले मनाऊँ गणराज, गजानंद आ जइयो, म्हारी विनती सुनो महाराज, गजानंद आ जइयो ॥ आज ये कैसी शुभ घड़ी आई, अंगना में मोरे बजत

॥श्लोक॥ प्रथम मनाये गणेश के, ध्याऊ शारदा मात, मात पिता गुरु प्रभु चरण मे, नित्य नमाऊ माथ॥ गजानंद महाराज पधारो, कीर्तन की तैयारी है, आओ

बेगा सा पधारो जी, सभा में म्हारे आओ गणराज, थे बेगा पधारो जी ॥ भक्त खड़े था की बाट निहारे, भक्त खड़े था की बाट
