
जय गणेश जय गजवदन, कृपा सिंधु भगवान – भजन (Jai Ganesh Jai Gajvadan Kripa Sindhu Bhagwan)
जय गणेश जय गजवदन, कृपा सिंधु भगवान । मूसक वाहन दीजिये, ज्ञान बुद्धि वरदान ॥1॥ शिव नंदन गौरी तनय, प्रथम पूज्य गणराज । सकल अमंगल

जय गणेश जय गजवदन, कृपा सिंधु भगवान । मूसक वाहन दीजिये, ज्ञान बुद्धि वरदान ॥1॥ शिव नंदन गौरी तनय, प्रथम पूज्य गणराज । सकल अमंगल

तेरे दर पे माँ, जिंदगी मिल गई है, मुझे दुनिया भर की, ख़ुशी मिल गई है, तेरे दर पे माँ, जिंदगी मिल गई है ॥

जिस भजन में राम का नाम ना हो, उस भजन को गाना ना चाहिए ॥ चाहे बेटा कितना प्यारा हो, उसे सिर पे चढ़ाना ना

सूरज की लाली तुझे तिलक लगाती है बगिया की डाली-डाली पुष्प चढ़ाती है पुरवाई आके तेरा भवन बुहारती बरखा की जल धारा चरण पघारती रिद्दी-सिद्धि

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥ जय गणेश गणनाथ दयानिधि, सकल विघन कर दूर हमारे, जय गणेश

मेरी झोपड़ी के भाग, आज खुल जाएंगे, राम आएँगे, राम आएँगे आएँगे, राम आएँगे, मेरी झोपडी के भाग, आज खुल जाएंगे, राम आएँगे ॥ राम

गुणवान मेरे गणपति बुद्धि के है दाता है मेरे दाता सबके दाता भाग्यविधाता । मेरे दाता,मेरे दाता, मेरे दाता, मेरे दाता है मेरे दाता सबके
