
छठ पूजा: कांच ही बांस के बहंगिया (Chhath: Kanch Hi Bans Ke Bahangiya)
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय बहंगी लचकत जाय होई ना बलम जी कहरिया, बहंगी घाटे पहुंचाय कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी

कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय बहंगी लचकत जाय होई ना बलम जी कहरिया, बहंगी घाटे पहुंचाय कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी

मत रोवे ऐ धौली धौली गाय, दुनियाँ में अड़े कोई ना सुखी, मत रोवे ऐ धौली धौली गाय, दुनियाँ में अड़े कोई ना सुखी, मैं

गोविंद चले चरावन धेनु । गृह गृह तें लरिका सब टेरे शृंगी मधुर बजाई बेनु ॥ सुरभी संग सोभित द्वै भैया लटकत चलत नचावत नेंन

ऊ जे केरवा जे फरेला# खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए+। मारबो^ रे सुगवा** धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए । ऊ जे सुगनी जे रोएली

बन परदेशिया जे गइल शहर तू बिसरा के लोग आपन गांव के घर तू उहे घरवा उहे गलिया पुकारे छठि मैया रास्ता निहारे जय हो

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल, तुम बिन रह्यो न जाय हो ॥ बृजराज लडेतोलाडिले ॥ बंक चिते मुसकाय के लाल, सुंदर वदन दिखाय ॥ लोचन

दीपावली के तुरंत बाद आने वाली गोवर्धन पूजा में गाई जाने वाली प्रमुख आरती। श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ। ॥
