
माँ के दिल जैसा, दुनिया में कोई दिल नहीं: भजन (Maa Ke Dil Jaisa Duniya Mein Koi Dil Nahi)
इससे बढ़ के कोई शय भी, कोमल नहीं, माँ के दिल जैसा, दुनिया में कोई दिल नहीं, माँ का दिल, माँ का दिल, माँ का

इससे बढ़ के कोई शय भी, कोमल नहीं, माँ के दिल जैसा, दुनिया में कोई दिल नहीं, माँ का दिल, माँ का दिल, माँ का

माँ तू है अनमोल, जो जाने मेरे बोल, माँ तेरा ना कोई मोल, तू तो प्रेम की मूरत है, माँ तू प्रेम की मूरत है

ॐ शब्द सोऽहं ध्यावे, स्वामी शब्द सोऽहं ध्यावे । धूप दीप ले आरती, निज हरि गुण गावे । मंदिर मुकुट त्रिशुल ध्वजा, धर्मों की फ

जयति तेऽधिकं जन्मना व्रजः श्रयत इन्दिरा शश्वदत्र हि । दयित दृश्यतां दिक्षु तावका स्त्वयि धृतासवस्त्वां विचिन्वते ॥1॥ शरदुदाशये साधुजातसत्स- रसिजोदरश्रीमुषा दृशा । सुरतनाथ तेऽशुल्कदासिका वरद

बिन पानी के नाव खे रही है, माँ नसीब से ज्यादा दे रही है ॥ भूखें उठते है भूखे तो सोते नहीं, दुःख आता है

सुखी मेरा परिवार है, ये तेरा उपकार है, मेरे घर का एक एक पत्थर, तेरा कर्जदार है ॥ देख गरीबी घबराए हम, रहते थे परेशान

सीता राम जी प्यारी राजधानी लागे, राजधानी लागे, मोहे मिठो मिठो, सरजू जी को पानी लागे। सीता राम जी प्यारी राजधानी लागे, राजधानी लागे, मोहे
