
सियारानी का अचल सुहाग रहे – भजन (Bhajan: Siyarani Ka Achal Suhag Rahe)
मेरे मिथिला देश में, आओ दूल्हा भेष । ताते यही उपासना, चाहिए हमें हमेशा ॥ सियारानी का अचल सुहाग रहे । मैया रानी का अचल

मेरे मिथिला देश में, आओ दूल्हा भेष । ताते यही उपासना, चाहिए हमें हमेशा ॥ सियारानी का अचल सुहाग रहे । मैया रानी का अचल

हम शरण तेरी आए है, झुकाने को ये सर, कर दो उद्धार प्रभु मेरा, डाल के इक नजर, हम शरण तेरी आये है, झुकाने को

अगर प्यार तेरे से पाया ना होता, तुझे श्याम अपना बनाया ना होता ॥ ना होती तमन्ना हि, तेरे मिलन की, अगर मेरे मन को

चलो मन वृन्दावन की ओर, प्रेम का रस जहाँ छलके है, कृष्णा नाम से भोर, चलो मन वृंदावन की ओर ॥ भक्ति की रीत जहाँ

तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे, तू लगे दूल्हा सा दिलदार सांवरे । तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे, तू लगे दूल्हा सा दिलदार सांवरे । मस्तक

भजहु रे मन श्री नंद नंदन अभय-चरणार्विन्द रे दुर्लभ मानव-जन्म सत-संगे तारो ए भव-सिंधु रे भजहु रे मन श्री नंद नंदन अभय-चरणार्विन्द रे शीत तप

हमारे दो ही रिश्तेदार, एक हमारी राधा रानी, दूजे बांके बिहारी सरकार। हमारे दो ही रिश्तेदार, सेठ हमारे बांके बिहारी, सेठानी वृशभानु दुलारी, जो कोई
