
महल को देख डरे सुदामा – भजन (Mahal Ko Dekh Dare Sudama)
महल को देख डरे सुदामा का रे भई मोरी राम मड़ईया कहाँ के भूप उतरे इत उत भटकत,चहुँ ओर खोजत मन में सोच करे का

महल को देख डरे सुदामा का रे भई मोरी राम मड़ईया कहाँ के भूप उतरे इत उत भटकत,चहुँ ओर खोजत मन में सोच करे का

॥ भाग १ ॥ कल्पतरु पुन्यातामा, प्रेम सुधा शिव नाम हितकारक संजीवनी, शिव चिंतन अविराम पतिक पावन जैसे मधुर, शिव रसन के घोलक भक्ति के

राम तुम बड़े दयालु हो, नाथ तुम बड़े दयालु हो, हरी जी तुम बड़े दयालु हो ॥ और ना कोई हमारा है, मुझे इक तेरा

बनवारी रे, जीने का सहारा तेरा नाम रे, मुझे दुनिया वालों से क्या काम रे ॥ झूठी दुनिया, झूठे बंधन, झूठी है ये माया, झूठा

जरा इतना बता दे कान्हा, कि तेरा रंग काला क्यों । श्लोक- श्याम का काला बदन, और श्याम घटा से काला, शाम होते ही, गजब

फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन बिहारी, और साथ सज रही है, वृषभानु की दुलारी ॥ टेढ़ा सा मुकुट सर पर, रखा है किस

नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा, श्याम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नन्दा, भजो रे मन गोविंदा, श्याम सुंदर मुख
