
नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो (Nagri Ho Ayodhya Si, Raghukul Sa Gharana Ho)
नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो । और चरण हो राघव के, जहाँ मेरा ठिकाना हो ॥ हो त्याग भारत जैसा, सीता सी

नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो । और चरण हो राघव के, जहाँ मेरा ठिकाना हो ॥ हो त्याग भारत जैसा, सीता सी

नैनन में श्याम समाए गयो, मोहे प्रेम का रोग लगाए गयो । नैनन में श्याम समाए गयो, मोहे प्रेम का रोग लगाए गयो । लुट

श्यामा श्याम सलौनी सूरत को शृंगार बसंती है । किशोरी श्याम सलोनी सूरत को सिंगार बसंती है । मोर मुकुट की लटक बसंती चंद्रकला की

काल के पंजे से माता बचाओ, जय माँ अष्ट भवानी, काल के पंजे से माता बचाओ, जय माँ अष्ट भवानी । हे नाम रे सबसे

मैं तो अपने मोहन की प्यारी, सजन मेरो गिरधारी, सजन मेरो गिरधारी, गिरधारी गिरधारी, गिरधारी गिरधारी, मैं तो अपने मोहन की प्यारी, सजन मेरो गिरधारी।।

शंकर तेरी जटा से, बहती है गंग धारा, काली घटा के अंदर, जु दामिनी उजाला, शंकर तेरी जटा से, बहती है गंग धारा ॥ गल

चोख पुरावो, माटी रंगावो, आज मेरे पिया घर आवेंगे खबर सुनाऊ जो, खुशी ये बताऊँ जो, आज मेरे पिया घर आवेंगे ॥ हेरी/ओरी सखी मंगल
