
हर घडी भोले दिल में, रहा कीजिये: भजन (Har Ghadi Bhole Dil Mein Raha Kijiye)
हर घडी भोले दिल में, रहा कीजिये, चरणों में प्रभु जी, जगह दीजिये, हर घड़ी भोले दिल में, रहा कीजिये ॥ जो भी शरण में

हर घडी भोले दिल में, रहा कीजिये, चरणों में प्रभु जी, जगह दीजिये, हर घड़ी भोले दिल में, रहा कीजिये ॥ जो भी शरण में

कर दो दुखियो का दुःख दूर, ओ बाघम्बर वाले, कर दो प्रभुजी बेड़ा पार, ओ शिव शंकर भोले ॥ कोई चढ़ावे शिव जी जल की

शिव सन्यासी से मरघट वासी से, मैया करूँगी मैं तो ब्याह, मैं शिव को ध्याऊँगी, उन्ही को पाऊँगी, शिव संग करूँगी मैं तो ब्याह, हाँ

खोलो समाधी भोले शंकर, मुझे दरश दिखाओ, इस जग की झूठी माया, से मुझको बचाओ, खोलो समाधि भोले शंकर, मुझे दरश दिखाओ ॥ शिव शिव

म्हारा उज्जैन का महाराजा ने, खम्मा रे खम्मा, भक्तां लाडीला महाकाल जी ने, खम्मा रे खम्मा, खम्मा रे खम्मा घणी रे खम्मा, म्हारां उज्जैन का

शिव के रूप में आप विराजे, भोला शंकर नाथ जी ॥ श्लोक – सौराष्ट्रे सोमनाथं च, श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्, उज्जयिन्यां महाकाल, ओमकारम ममलेश्वरम्। परल्यां वैजनाथं च,

यह भजन 15वीं सदी में गुजराती भक्तिसाहित्य के श्रेष्ठतम कवि नरसी मेहता द्वारा मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखा गया है। यह भजन उसी
