तुम शरणाई आया ठाकुर
तुम शरणाई आया ठाकुर ॥
उतरि गइओ मेरे मन का संसा,
जब ते दरसनु पाइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
अनबोलत मेरी बिरथा जानी
अपना नामु जपाइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
दुख नाठे सुख सहजि समाए,
अनद अनद गुण गाइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
बाह पकरि कढि लीने अपुने,
ग्रिह अंध कूप ते माइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
संसार ये छूटे चाहें प्राण ये छुटे: भजन (Sansar Ye Chhute Chahe Pran Ye Chhute )
प्रज्ञानं ब्रह्म महावाक्य (Prajnanam Brahma)
दूल्हा बने भोलेनाथ जी हमारे: भजन (Dulha Bane Bholenath Ji Hamare)
कहु नानक गुरि बंधन काटे,
बिछुरत आनि मिलाइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
Post Views: 413








